Friday, December 3, 2010

Krashan Janmasthmi Utsav



कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव-
बाल भवन जयपुर एवं सम्बद्ध बाल केन्द्रों गोडावण और सारस में कृष्ण जन्मस्थामी उत्सव धूमधाम से मनाया गया। जिसमे बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये। बच्चों ने भगवान कृष्ण के जीवन पर आधारित गीतों पर नृत्य, गायन और नाटकों का मंचन किया। सारस बाल केंद्र में 2 सितम्बर और गोडावण बाल केंद्र में 3 सितम्बर को मनाया गया।

Thursday, December 2, 2010

Board Member of National Bal Bhavan Mrs. Nasira Sharma's Visit



Board Member of National Bal Bhavan Mrs. Nasira Sharma's Visit
नॅशनल बाल भवन नई दिल्ली की सीनियर बोर्ड मेम्बर श्रीमती नासिर शर्मा ने 27 से 29 अगस्त, 2010 तक बाल भवन जयपुर एवं सम्बद्ध बाल केन्द्रों सारस व गोडावण का अवलोकन कर बच्चों से रूबरू हुई।

Druvpad Singing Workshop

Druvpad Singing Workshop
इंटर नेशनल ध्रुवपद धाम ट्रस्ट की और से ध्रुवपद प्रचार प्रसार के तहत गोडावण बाल केंद्र में ध्रुवपद प्रशिक्षण कार्यशाला का 21 अगस्त, 2010 को आयोजन किया गया। इसमें प्रदेश के वरिष्ठ ध्रुवपद गायक पंडित लक्ष्मण भट्ट तैलंग और डॉक्टर मधु भट्ट तैलंग ने ध्रुवपद गायिकी के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रमुख तत्वों तथा भारतीय शास्त्रीय संगीत को साधने के सरल तरीको की बच्चों को जानकारी दी। उन्होंने बातचीत की रोचक शैली तथा कई बाल गीतों के माध्यम से संगीत के सुरों और लय ताल की विभिन्न इकाईयों के बारे में बताया। कार्यक्रम के बाद कलाकारों ने बच्चों से कार्यशाला में समझाई गई बातों से सम्बंधित प्रश्न पूछे तथा सही जवाब देने वाले को ट्रस्ट की और से नकद इनामों से नवाजा गया।

सम्मान - गोडावण बाल केंद्र


गोडावण बाल केंद्र के बच्चों को 20 अगस्त, 2010 को गत दिनों आयोजित विभिन्न कार्यशालाओं में उल्लेखानिये प्रदर्शन करने पर सम्मानित किया गया।

National Bal Shree Honour-2010

BALSHREE-2010

बाल भवन जयपुर में राष्ट्रीय बालश्री सम्मान - 2010 का तीन दिवसीय आयोजन 16 से 18 अगस्त, 2010 को किया गया। जिसमे 9 से 16 आयु वर्ग के बच्चों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। 16 अगस्त को रचनात्मक कला (ड्राईंग व मूर्तिकला में) और रचनात्मक लेखन में अपनी, 17 अगस्त को रचनात्मक अभिव्यक्ति (नृत्य कला, संगीत कला एवं नाट्य कला में तथा 18 अगस्त को नवीनीकरण विज्ञानं में अपनी कल्पनाशीलता और असाधरण सोच का परिचय दिया।
शिविर के विशेषज्ञों में वरिष्ठ रंगकर्मी श्री बेनी प्रसाद शर्मा, प्रसिद्ध ध्रुवपद गायिका डॉक्टर मधु भट्ट तैलंग, लेखक डॉक्टर दुर्गा प्रसाद अग्रवाल, विज्ञानवेत्ता श्री सौम्य दत्ता और श्री मोहन कुमार शर्मा, श्री हिमांशु सिंह, कत्थक एवं लोक कलाकार श्रीमती अंजना खिलनानी और श्री राकेश व्यास थे।

Independence Day Celebration


बाल भवन जयपुर परिसर में बाल केन्द्रों गोडावन और सारस के बच्चों के साथ सवतंत्रता दिवस समारोह मनाया गया जिसमे बच्चों ने रचनात्मक खेलों, मार्चपास्ट, कविता पाठ, गीतों के माध्यम से अपने देश के सवतंत्रता संग्राम में आहुति देने वाले वीरों को याद किया।

Teej Festival


बाल भवन जयपुर में बाल केन्द्रों के बच्चों के साथ 12 अगस्त, 2010 तीज उत्सव मनाया गया। जिसमे बच्चों ने रचनात्मक खेलों में "साफा बंधन", 'मटकी दौड़', संस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये गये।

Wednesday, December 1, 2010

Munshi Premchand Birthday Celebration - Creative Writting



मुंशी प्रेमचंद जन्मोत्सव पर लेखन कार्यशाला आयोजित -
प्रख्यात लेखक मुंशी प्रेमचंद के साहित्य से बच्चों को रूबरू करवाने के लिए प्रेमचंद के जन्मोत्सव पर बाल भवन जयपुर में दो दिवसीय सर्जनात्मक लेखन कार्यशाला 30 व 31 जुलाई, 2010 आयोजित की गयी। प्रथम दिन बच्चों को प्रेमचंद के साहित्य से अवगत करवाते हुए लेखक विशेषग्य डॉक्टर दुर्गा प्रसाद जी अग्रवाल और डॉक्टर हेतु भारद्वाज ने बताया कि प्रेमचन कि कहानियों के पात्र, पात्र न हो कर समाज की व्यवहारिकता का आईना हें। जिसके माध्यम से आपके दिल में प्रवेश करके आपके मन को बदलता हे। प्रेमचंद के पात्रों, परिवेश का हर पड़ने वाले को समयानुसार अनुभूति होती हे और सत्य की अभिव्यक्ति, साहित्य से ही संभव हे। इसको हम विज्ञानं और एतिहासिक तथ्यों से सिद्ध नही कर सकते।
विशेषज्ञों ने प्रेमचंद के समय परिवेश विचारों की जानकारी देते हुए कहा की प्रेमचंद की लेखनी ने समाज के म्रत्प्राय स्वरूप में शहीदी बारूद का कम किया। जिसके कारण अंग्रेजों ने उनकी पुस्तकों पर पाबंदी लगा दी थी।
बच्चों को प्रेमचंद की लिखी हुए छोटी-छोटी कहानियों की किताबे पड़ने को दी। जिसमे बच्चों को इन कहानियों के परिवेश, वातावरण और पात्रों की मनोस्थ्ती पर अपने विचारों को अभिव्यक्त करना था।
दुसरे दिन ३१ जुलाई को प्रथम सत्र में बच्चों ने प्रेमचंद की बाल रचनाओं 'बड़े भाईसाब', 'गुल्ली डंडा', 'ईदगाह', 'कुत्ते की कहानी', दो बेलों की कथा', 'बड़े घर की बेटी', चतुर सुजान', आदि पर रोचक चर्चा करते हुए इन कहानियों के कथानक में आने वाले परिद्रश्य एवं संवाद रचना पर बच्चों ने अपने-अपने विचारों को रखा।
अगले सत्र में बच्चों को कहानी कैसे लिखे, किन बातों का ध्यान रखा जाए और आस-पास के परिदर्श को कैसे रेखांकित किया जाए की जानकारी देते हुए विशषज्ञों ने बताया की लेखन कार्य ब्रह्मा के बराबर हे और इसके लिए जिन्दगी को गहराई से महसूस करना होगा। अपनी स्वं की जिंदगी से रूबरू होने के साथ हमें आत्मविश्वास को जाग्रत करने पर ही लिखने के लिए कलम चलानी चाहिए।
प्रख्यात लेखक मुंशी प्रेमचंद के साहित्य से बच्चों को रूबरू करवाने के लिए प्रेमचंद के जन्मोत्सव पर बाल भवन जयपुर में दो दिवसीय सर्जनात्मक लेखन कार्यशाला 30 व 31 जुलाई, 2010 आयोजित की गयी। प्रथम दिन बच्चों को प्रेमचंद के साहित्य से अवगत करवाते हुए लेखक विशेषग्य डॉक्टर दुर्गा प्रसाद जी अग्रवाल और डॉक्टर हेतु भारद्वाज ने बताया कि प्रेमचन कि कहानियों के पात्र, पात्र न हो कर समाज की व्यवहारिकता का आईना हें। जिसके माध्यम से आपके दिल में प्रवेश करके आपके मन को बदलता हे। प्रेमचंद के पात्रों, परिवेश का हर पड़ने वाले को समयानुसार अनुभूति होती हे और सत्य की अभिव्यक्ति, साहित्य से ही संभव हे। इसको हम विज्ञानं और एतिहासिक तथ्यों से सिद्ध नही कर सकते।
विशेषज्ञों ने प्रेमचंद के समय परिवेश विचारों की जानकारी देते हुए कहा की प्रेमचंद की लेखनी ने समाज के म्रत्प्राय स्वरूप में शहीदी बारूद का कम किया। जिसके कारण अंग्रेजों ने उनकी पुस्तकों पर पाबंदी लगा दी थी।
बच्चों को प्रेमचंद की लिखी हुए छोटी-छोटी कहानियों की किताबे पड़ने को दी। जिसमे बच्चों को इन कहानियों के परिवेश, वातावरण और पात्रों की मनोस्थ्ती पर अपने विचारों को अभिव्यक्त करना था।
दुसरे दिन ३१ जुलाई को प्रथम सत्र में बच्चों ने प्रेमचंद की बाल रचनाओं 'बड़े भाईसाब', 'गुल्ली डंडा', 'ईदगाह', 'कुत्ते की कहानी', दो बेलों की कथा', 'बड़े घर की बेटी', चतुर सुजान', आदि पर रोचक चर्चा करते हुए इन कहानियों के कथानक में आने वाले परिद्रश्य एवं संवाद रचना पर बच्चों ने अपने-अपने विचारों को रखा।
अगले सत्र में बच्चों को कहानी कैसे लिखे, किन बातों का ध्यान रखा जाए और आस-पास के परिदर्श को कैसे रेखांकित किया जाए की जानकारी देते हुए विशषज्ञों ने बताया की लेखन कार्य ब्रह्मा के बराबर हे और इसके लिए जिन्दगी को गहराई से महसूस करना होगा। अपनी स्वं की जिंदगी से रूबरू होने के साथ हमें आत्मविश्वास को जाग्रत करने पर ही लिखने के लिए कलम चलानी चाहिए।

Tuesday, November 30, 2010

Fun Wtih Science (Science Workshop)

Fun With Science (Science Workshop)-
बच्चों को खेल-खेल में विज्ञानं के मूलभूत तत्वों व इनके पीछे छिपे रहस्यों को समझाने के लिए बाल भवन जयपुर द्वारा दो दिवसीय 14 व 15 जुलाई, 2010 को "फन विद साइंस" कार्यशाला का आयोजन किया गया। बाल भवन जयपुर की सदस्य संस्थाओं के बच्चों के लिए आयोजित कार्यशाला में बच्चों को किताबी बातों के अलावा अपनी सोच को विकसित करना और खुद प्रयोग करके उसके अन्य तत्वों कि शौधपरक जानकारी बच्चों को देना था।
कार्यशाला में बच्चों को क्यों, कैसे ? के विचार को रेखांकित करके किसी भी कार्य के पीछे छिपे साइंस को खोजने का प्रयास करना और अपनी सर्जनशीलता कि और प्रेरित किया गया। बच्चों को ग्रुप में बांटकर टास्क दी गयी। टास्क को बच्चों को किताबी ज्ञान के बजाय अपने नियमों से समझना था। इसमें बच्चों ने जहाँ अपनी सोच का प्रयोग किया तो विशेषग्य दिल्ली के विज्ञानवेत्ता श्री सौम्य दत्ता ने प्रयोगों के माध्यम से किसी वैज्ञानिक तत्व वस्तु कि उपयोगिता, प्रकृति, कठोरता, तरलता के आधार को वर्गीकृत कर उनके बारे में विस्तृत एवं प्रयोगात्मक जानकारी दी। उन्होंने बच्चों को साइंस को पड़ते समय अपनी सोच के फन को विकसित करने पर जोर दिया।

Creative Games with Magic

Creative Games With Magic-
7 जुलाई, 2010 को बच्चों को सर्कस कला से रूबरू करवाने के लिए हुए कार्यक्रम में लन्दन के मिस्टर डेन छोटे एवं रोमांचित कर देने वाले खेलों से अवगत करवाया।

Saturday, November 27, 2010

Cat-walk for Titali Club Children

Cat-walk for titali club children
तितली क्लब के बच्चों के लिए क्रियेतिवे गमेस और केट वॉक 24 जून, 2010 को संपन्न हुई जिसमे बच्चों ने अपनी रचनात्मक का परिचय दिया।

ZOO VISIT

Jaipur Zoo Visit
बाल भवन जयपुर एवं सम्बद्ध बाल केन्द्रों सारस, गोडावन के बंच्चों ने 20 जून 2010 को जयपुर जू ले जाया गया जहा पर पशु-पक्षियों के बारे में जानकारी प्राप्त की।

B.M. BIRLA PLANTARIUM -

B.M. BIRLA PLANTARIUM -
गोड़ावन बाल केंद्र के बच्चों ने 06 जून, 2010 बिरला तारामंडल का अवलोकन कर खगोलीय एवं आकाशिए घटनाओं, रहस्यों की जानकारी प्राप्त की। बच्चों को सौर मंडल के ग्रहों, तारों, आकाश गंगाओं में चमकते लाखों ताराओं के रहस्यों के साथ लगभग १००० साल बाद भविष्य में जब मानव अन्य ग्रहों पर भी रहना शुरू करेगा के साथ ग्रहों पर आधारित राशि चक्र के बारे में फ़िल्म के माध्यम से जान्स्कारी दी।

Make-up in Theatre

MAKEUP IN THEATRE-
बाल भवन जयपुर में नाट्य कला के महत्वपूर्ण अंग मेकौप के बारे में बच्चों को अवगत करवाने के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसके विशेश्घ गुजरात के प्रसिद्ध बहरूपिये और मेकप मेन श्री सिकन्दर अबास थे। नाटय कला के पात्रों को मेकप से उसके लक्षणों से कैसे उभारा जाए की जानकारी देने के साथ मेकप में काम आने वाली वस्तुओं के बारे में बताया।

Anti Tobacco Day Celebration

Anti Tobacco day celebration-
बाल भवन जयपुर द्वारा तम्बाकू निषेध दिवस की पूर्व संध्या पर 30 मई, 2010 को बाल भवन परिसर में "संकल्प" का आयोजन कर मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अथिति सांसद श्री लालचंद कटारिया थे। बाल भवन जयपुर अपनी स्थापना के साथ ही बच्चों के माध्यम से तम्बाकू मुक्त समाज की संरचना करने का प्रयास कर रहा हे। इसी के तहत तम्बाकू निषेध दिवस की पूर्व संध्या पर सकारात्मक सन्देश समाज में देने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम संपन्न हुआ। जिसमे बच्चों द्वारा अप्रैल एवं मई माह में किये गये अपने कार्यों को प्रदर्शित किया गया। चित्र प्रदर्शनी, तम्बाकू सेवन से होने वाली अकाल मरतु से यमलोक में हो रही आवास व्यवस्था की समस्यों को रेखांकित करते हास्य-व्यंग से भरपूर नाटक "संकल्प" का मंचन किया गया। इस अवसर पर गत अप्रैल एवं मई माह में "धुम्रपान निषेध" पर आयोजित पेंटिंग कार्यशालाओं में उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले बच्चों को पुरष्कृत किया गया।

Thum Printing Session for Titli-club

Thumb painting -
बच्चों को रचनात्मक कलाओं के विभिन्न माध्यमों से अवगत करवाने के लिए समय समय पर आयोजित होने वाली कार्यशालाओं के तहत थम्ब पेंटिंग का सेसन श्री राकेश व्यास के सानिध्य में 26 मई, 2010 को आयोजित किया गया। इस सेसन में बच्चों को अपने थम्ब की सहायता से कैसे पशु-पक्षिओं, पेड़-पौधों को बना सकते हे की विस्तृत जानकारी दी गयी। बच्चों के प्रयास इस कार्यशाला में देखते ही बनते थे।

Anti Tobacco Workshop

Anti Tobacco Workshop--
बाल भवन जयपुर परिसर में नियमित बच्चों को धुम्रपान सेवन से होने वाली बिमारियों से अवगत करवाने के लिए कार्यशाला का आयोजन २३ मई, २०१० को किया गया। जिसमे बच्चों को लघु फ़िल्म के माध्यम से, प्रश्नोतरी के माध्यम से, पेंटिंग प्रदर्शनी के माध्यम से जानकारी दी गयी। इस अवसर पर पर्यवारंविद कर्नल जे.एस.बरार ने धुम्रपान सेवन से स्वय एवं परिवार के सदयों को दूर रखने की अपील की।

Astham Care Centre Visit

Asthamaa Care Centre Visit-
गोडावण बाल केंद्र के बच्चों को विद्याधर नगर स्थित अस्थमा केयर सेंटर पर धुम्रपान के सेवन से होने वाले प्रभावों की जानकारी देने के लिए 16 मई, 2010 को भ्रमण हेतु ले जाया गया। यहा पर समाजसेवी और धुम्रपान को प्रतिबंधित करने के लिए संघर्ष कर रहे श्री धर्मवीर कटेवा ने बच्चों को पोस्टरों एवं फ़िल्म क्लिपिंग्स के माध्यम से धुम्रपान के खतरों से आगाह करते हुए इनसे स्वंम एवं परिवार को दूर रखने की अपील की।

Bal Bhavan Jaipur Cricket Academy

बाल भवन जयपुर क्रिकेट अकादेमी ___
बाल भवन जयपुर में बच्चों को क्रिकेट की बारीकियों एव क्रिकेट के क्षेत्र में बच्चों को उचित मार्गदर्शन देने, प्रोत्साहन करने के लिए बाल भवन जयपुर क्रिकेट अकादेमी का शुभारम्भ 15 मई, 2010 ko किया गया। पूर्व रणजी खिलाडी श्री आर.एस.काला द्वारा बच्चों को प्रशिक्षित किया जा रहा।

Anti Tobacco Workshop


राजस्थान पुलिस अकादेमी स्थित बाल भवन जयपुर द्वारा संचालित गोडावन बाल केंद्र में बच्चों को धुम्रपान के सेवन से होने वाली बीमारियों से अवगत करवाने के लिए 14 मई, 2010 को कार्यशाला आयोजित की गयी। बच्चों को लघु फ़िल्म के माध्यम से धुम्रपान के प्रभावों के बारे में जानकारी दी गयी। जिसमे नशीले पदार्थों जैसे जर्दायुक्त गुटखा, खैनी, सुपारी, त्म्बाकुयुक्त मंजन, बीडी सिगरेट, नसवार के प्रयोगों से गले व फेफड़ों का कैंसर, लकवा, ब्लड प्रसर, टीबी, अस्थमा जैसी लम्बी एव दर्दनाक पीड़ा को जन्म देकर जीवन को नार्कियता तक पहुंचा देती हे। बच्चों ने धुम्रपान सेवन से शारीर पर पड़ने वाले खतरों को चित्रों, स्लोगन के माध्यम से उकेर कर समाज को धुम्रपान मुक्त करने का संकल्प लिया।

Wednesday, November 24, 2010

Saaras Bal Kendra (New Place)


बाल भवन जयपुर द्वारा अमर नगर खिरनी फाटक, राणा बस्ती में संचालित सारस बाल केंद्र को अमर नगर के राजकीय प्राथमिक विद्यालय में 05 मई, 2010 को स्थानांतरित किया गया। इस विद्यालय में केंद्र को संचालित करने की अनुमति शिक्षा विभाग राजस्थान सरकार द्वारा दी गयी हे।

Heritage Walk

हेरीटेज सप्ताह पर बच्चों को 02 मई, 2010 को जयपुर के एतिहासिक स्थलों की जानकारी देने के लिए हेरीटेज वाँक का कार्यक्रम आयोजित किया गया। हेरिटेज वॉक में बच्चों को हवा महल, जंतर-मंतर, पोंद्रिक उद्यान, गोविन्द देवजी के मंदिर, अल्बर्ट हॉल मुजियम, शहीद इस्मारक, स्टेचू सर्किल आदि के महत्व से अवगत करवाया गया।

Bal Bhavan Jaipur' s B'day - Cultural Eveing


बाल भवन जयपुर का 8 वे स्थापना दिवस (29 अप्रैल, 2010) पर बच्चों ने रंगारग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। बच्चों ने राजस्थानी और पाश्चात शैली के गानों पर नृत्य एव लघु नाटकों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर राजस्थान विधान सभा की सदस्य विधायक डॉक्टर परमनवदीप सिंह ने भी बच्चों की कला को सहराया।

Collage Making for Titali Club (कोलाज मेकिंग)


सर्जनात्मक कला की विभिन्न विद्याओं से अवगत करवाने के लिए तितली क्लब के बच्चों हेतु 25 अप्रैल, 2010 को कोलाज मेकिंग कार्यशाला में पुरानी मग्जिन, अखबार व रंगीन कागज के टुकड़ों को गोंद की सहायता से चिपकवा कर सुरुचि कलाकृतियों का निर्माण करने की जानकारी दी गयी।

Tuesday, November 23, 2010

Aamer Visti - (बावडियों का अवलोकन)


बाल भवन जयपुर के प्रयावरण और जल संरक्षण के लिए कार्य कर रहे धरादूत और वरुण दूतों को 25 april, 2010 को जयपुर के आमेर में निर्मित प्राचीन जल संरक्षण के लिए बनाई गयी बावडियों के बारे में जानकारी देने के लिए भ्रमण पर ले जाया गया। यहाँ पर बच्चों को इन बावडियों के महत्व के बारे में अवगत करवाते हुए इनमे कैसे जल आता है और इस जल का उपयोग कैसे किया जाता है की जानकारी स्थानीय बुजुर्गो ने दी।

Earth Day - "Maati-Utsav" (माटी उत्सव)


पृथ्वी दिवस के अवसर पर दो दिवसीय माटी उत्सव का आयोजन 21 - 22 अप्रैल, 2010 को किया गया। माटी उत्सव में बाल भवन जयपुर की सदस्य संस्थाओ के बच्चों ने धरती माँ के प्रति अपनी भावनाओं को मिटटी के विभिन्न रूपों में उकेरने के साथ पोस्टर मकिंग, स्लोगन लेखन से अभिव्यक्त की। माटी उत्सव में प्रख्यात लेखक देवरिषि डॉ कलानाथ शास्त्री ने बच्चों को पृथ्वी दिवस के जानकारी देते हुए बताया कि हमारे शास्त्रों में हजारों वर्ष पहले ही विद्वानों ने लिख दिया था कि धरती पर अनेक प्रकार कि बहुमूल्य प्राकृतिक वस्तुए हे, जिनको यदि सरक्षित नही किया गया तो भविसये में इनके परिणामों से मानव जाती को अनेक समस्याओ से रूबरू होना पड़ेगा। वेदों में लिखे धरती के रूपों कि संरचना से बच्चों को अवगत करवाते हुए बताया कि पहले ऋषि-मुनि आदि मूर्ति पूजा के बजाय प्रकृति के मूल स्वरूपों सूर्य, धरती, हवा, पानी कि पूजा करते थे, कालान्तर में इनको मानव रूपों में मूर्तियों में बनाया गया तब से मानव ने मूल रूपों को छोड़कर मूर्ति कि पूजा करने लगे। जिनका प्रभाव धरती पर पड़ रहा हे।
पृथ्वी दिवस पर बच्चों ने पृथ्वी अथार्थ धरती रूपी माँ पर हो रहे कैंसर रूपी जहरीले प्रदूषणों से बचाने कि मार्मिक अपील को चित्रों, पोस्टर मकिंग, स्लोगन लेखन, मिटटी से चाक पर दीपक, पशु-पक्षियों सहित अनेक प्रकार कि प्राकृतिक चीजे बनाकर कि।

Meeting with Ambassdor of Earth & Ambassdor of Water


18 अप्रैल, 2010 को बाल भवन जयपुर द्वारा पर्यावरण सुरक्षा और जल सरक्षण के लिए नियुक्त धरादूत और वरुणदूतों की प्रत्येक रविवार को होने वाली मीटिंग हूई, जिसमे बच्चों ने अपने द्वारा सम्पादित रिपोर्ट एक दुसरे के साथ शेयर की और आगे के पॉइंट्स पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

Creative Games Session for Titali Club

18 अप्रैल, 2010 को 35 से 6 आयु वर्ग के बच्चों के लिए creative games कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमे बच्चों ने थ्री लेग, रुमाल झपट्टा, मुजिकल चयर सहित अनेक रोमांचक खेलों में बच्चों ने अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया.

Thursday, March 4, 2010

BAL BHAVAN JAIPUR - An Introduction



Bal Bhavan Jaipur
An Introduction

Bal Bhavan Shiksha Samiti is a registered Society under Rajasthan Society act 1958. On the 29th of April, 2002 it made a humble beginning of Bal Bhavan Jaipur with just 19 enrolled members. Today we are reaching out to more than 34,000 children as our direct members as well as through our network of member schools.

Established and run by the Bal Bhavan Shiksha Samiti and affiliated to National Bal Bhavan New Delhi, Bal Bhavan Jaipur is the first and only one of its kind in the state of Rajasthan. Our membership is open to all children between the age group of 3 to 16 years, regardless of their educational and social background. Since our inception we have dedicated ourselves to the nurturing and expression of the creative talent of our children. Bal Bhavan Jaipur has special programmes for underprivileged children and those with physical and mental disabilities, aimed at integrating them with the mainstream.

At Bal Bhavan Jaipur we believe in the ability of a child to influence the society today rather than tomorrow. Thus, in an effort to make the children aware and responsible citizens of our country, all our activities are woven around relevant social and environmental issues which they can relate with. Through dance, music (vocal and instrumental), theatre, drawing/painting, clay modeling, waste management/craft, creative writing, public speaking, team sports and a myriad of other activities, Bal Bhavan aims to create an atmosphere where learning is participative and fun.

Our year round calendar of activities includes periodic camps and special workshops, such as the “Jal Mahotsav”, “Science in Everyday Life”, “The Truth Behind Miracles”, “Ullaas-Theatre Workshop”, “Bapu Ki God Mein Teen Din” (Three day camp based on Gandhian Values), “Trotz Allem” (Day Camp for physically and mentally challenged children) and the “Annual Environment Camp” (Winter residential). In theatre the children have expressed themselves wonderfully in campaigns such as “Yam Naam Satya Hai” (Anti-Tobacco Campaign), “Apne Andar Ke Ravan Ko Jalao” (Say No To Crackers), “Jal Hee Jeevan Hai” (Water Conservation) and “Netradaan Mahadaan” (Eye Donation Campaign). These plays include stage presentations as well as street plays and have been performed within and outside Jaipur.

Bal Bhavan Jaipur is a regular participant at the International Children’s Assembly held every year at National Bal Bhavan New Delhi. Our children also attend the “Young Environmentalist Camp” which is a national level camp organized by National Bal Bhavan. The highlight of the calendar year is the three tier selection process for the prestigious national Bal Shree Honour in which our children have been participating for the last five years. It is a matter of great pride for us that two of our children have received the National Bal Shree Honour 2007, conferred by Her Excellency the President of India, for Creative Scientific Innovation and Creative Performing Arts. Our children have also participated in the International Cultural Exchange Programme in Kazakhstan.

Bal Kendras
To reach out to more children we have started two Bal Kendras – “Saaras Bal Kendra” and “Godavan Bal Kendra” in April 2007.

Sankalp
Bal Bhavan Jaipur has taken up a special programme “Sankalp” to reach out to children living in slums and squatter settlements. Our aim is not only to provide them all the facilities extended to our regular members but also to integrate them with mainstream education. This has been made possible by the efforts of well meaning citizens who sponsor one child’s education for a year. Bal Bhavan Jaipur arranges not just for their school fees but the sponsorship also covers their books, uniform, stationary and other miscellaneous needs. Our resource persons help them out with their homework and are dedicated to the children’s academic as well as overall progress.

So far all the activities of Bal Bhavan Jaipur have been possible through the efforts of like minded individuals. In our effort we have been able to involve the Rajasthan Forest Department, Ground Water Department of Rajasthan, Indian Army, UNICEF, Mountaineering and Adventure Institute of Rajasthan, Rajasthan Science Society, B.M. Birla Planetarium, Tourism & Wildlife Society of India and the West Zone Cultural Centre.
All contributions to Bal Bhavan Shiksha Samiti are exempted under section 80G of the Income Tax Act.

Methodology
· Equal platform to children from different sections of society.
· Freedom of expression, exploration and experimentation to all our children.
· Non Formal Education through a hidden and structured syllabus.
· All activities are culture specific and environment friendly.
· The activities are theme based and woven around social and environmental issues.
· Hands on approach and participative learning.
· Nurturing atmosphere and cordial child-facilitator relationship.
· Cooperating with like minded persons and social organizations to achieve our aim and objectives.

Managing Committee
Mr. Anil Vaish, Advisor (Retd. C.S., Rajasthan)
Mr. R. S. Kumat, Chairperson (Retd. IAS)
Mrs. Charan Jeet Dhillon, Director
Mrs. P. N. Kavoori, Educationist
Dr. Rambabu Pareek
Mrs. Vijya Khanna, Educationist
Mr. Beni Prasad, Theater person
Dr. M. S. Sidhu
Col. (Retd.) V. S. Yadav
Dr. Susheel Nandal, Educationist
Dr. Madhu Bhatt Tailang, Classical Singar
Mr. Yogesh Goutam,
Director, National Bal Bhavan
Director, Primary and Secondary Education Department
Govt. of Rajasthan, Invited Member
Director, Women and Child Development Department
Govt. of Rajasthan, Invited Member

Sankalp Project




Bal Bhavan Jaipur has taken up a special programme "Sankalp" to reach out to children living in slums and squatter settlements. Our aim is not only to provide them all the facilities extended to our regular members but also to integrate them with mainstream education. This has been made possible by the efforts of well meaning citizens who sponsor one child's education for a year. Bal Bhavan Jaipur arranges not just their school fees but the sponsorship also covers their books, uniform, homework and are dedicated to the children's academic as well as overall progress.

Mobile Library - A wonder world for children


Mobile Library supported from National Bal Bhavan, New Delhi is a wonder world for children.

Wednesday, March 3, 2010

13th BIRD FAIR - 2nd & 3rd Feb., 2010




13rd Bird Fair - At Mansagar Lake, Jaipur

REPUBLIC DEY CELEBRATION


Republic Day celebration of Saaras Bal Kendra & Godavan Bal Kendra